Monday, March 29, 2010

"प्रेम"
प्रेम एक रंग है, उमंग है, तरंग है,
कि प्रेम से ह्रदय में एक दीप जगमगाती है |
प्रेम से ही गीत बने, प्रेम से ही मीत बने, 
प्रेम से ही जीवन में प्रकाश चली आती है |
प्रेम में ना भूख लगे, प्रेम में ना प्यास लगे,
प्रेम हो तो अंखियो में नींद नही आती है |
और प्रेम हो तो मीरा जैसी कृष्ण की दीवानी बने,
रात-दिन प्रेम के ही गीत गुनगुनाती है |  


 




"दीपक"         

Friday, March 5, 2010

"हसरत "

ठहरो जरा थोडा सा इंतजार तो कर लो ,
मेरे  जितना खुद को बेक़रार तो कर लो  || १ ||  

यकीन न आयें मोहब्बत पे मेरी तो कोई बात नही ,
झूठा ही सही इस दीवाने पे ऐतबार तो कर लो  || २ ||

उठ रही है महफ़िल में हर नजर तेरी ओर,
दीद-ऐ -हसरत की तरफ नजर एक बार तो कर लो  || ३ ||


कौन जाने ये मुलाकात फिर हो ना हो,
आओ बैठो चंद हमसे कुछ बात तो कर लो || ४ ||


होता है दुवाओं में असर ये तो सच है,
हसरते पूरी होने की फ़रियाद तो कर लो || ५ ||


"दीपक"

Sunday, January 31, 2010

""अभी बाकी है"


जिंदगी में देने अभी इम्तहान बहुत बाकी है।
निकले जो दिल से वो अरमान बहुत बाकी है।। १ ॥

यूँ न मायूश होकर बैठ एक ठोकर पर ऐ राही।
राह में बिखरे काँटों के जाल बहुत बाकी है॥ २ ॥

वक़्त की परवाह न कर चलता जा मंजिल की ओर ।
दिन भी अभी बाकी है रात बहुत बाकी है॥ ३ ॥

अभी तो निकला है इस राह में थोड़ा सा दम।
जोश अभी बाकी है जज्बात बहुत बाकी है ॥ ४ ॥

मौत से पहले न छोड़ यूँ उम्मीद का दामन।
तुझमे अभी जिन्दा इंसान बहुत बाकी है॥ ५ ॥







"दीपक"

Thursday, January 28, 2010



"जरुरी तो नहीं"

इजहारे मोहब्बत में इकरार जरुरी तो नहीं।
हो उनको भी मुझसे प्यार जरुरी तो नहीं।
उठता है इन्कलाब जब याद उनकी आती है।
हो उनके दिल में भी सैलाब जरुरी तो नहीं ॥ १ ॥

आया है नभ में झूमता हुआ बादल ।
हो मेरे घर में भी बरसात जरुरी तो नहीं ॥ २ ॥

उनके गम को सीने से लगाये फिरता हूँ।
हो उनको भी मेरे दर्द का एहसास जरुरी तो नहीं॥ ३ ॥

बनकर शमां आग में उम्र भर जलता रहा है ये 'दीपक' ।
वो भी जलने आये बनकर परवाना ये जरुरी तो नहीं॥४॥









"दीपक "




प्रिय पाठकगण नमस्कार,

आज मै अपनी नविन कविता प्रकाशित कर रहा हूँ; आशा करता हूँ कि आप सब को पसंद आएगा।
कुछ पाठकगण ने शिकायत किया कि वो मेरे ब्लॉग पर कमेन्ट नहीं लिख पाते। मै आप सभी को बताना चाहूँगा कि कमेन्ट लिखने के लिए कमेन्ट पर क्लिक करे और अपना कमेन्ट टाइप करे, उसके बाद निचे दिए गए आप्शन में से anonymous सेलेक्ट करे और send कर दे।


"दर्द"

मेरे अश्क मेरे दर्द का पैमाना है।
हम आशिकों का कही ठौर न ठिकाना है।
अंजाम बस इतना सा है मोहब्बत करने वालो का।
यादों की अग्नि है और उस आग में जल जाना है॥ १ ॥

लब्जो में बयां करना इश्क को आसान नहीं ।
खामोश लबों से इस राज को कह जाना है।। २॥

मिले जो कोई अपना तो मुस्कुरा देते है हम।
ख़ुशी की आड़ में हर गम को छुपाना है॥ ३ ॥

छलका है आंख के समंदर से एक बूँद अभी
दुःख की बदली है और बरसात का भी आना है॥ ४ ॥

इजहार हम अपनी मुहब्बत का कर न सके उनसे।
मासूम से ''दीपक'' का बस इतना सा फ़साना है॥ ५॥


 
 
"दीपक"


Monday, December 14, 2009

सफर में कोई तन्हा छोड़ जाए तो दुःख होता है।
छोटी सी बात पर कोई रूठ जाए तो दुःख होता है।
बेगानों से मिले गम तो कोई बात नही।
चोट कोई अपना दे जाए तो दुःख होता है।
"दीपक"

Wednesday, December 2, 2009

प्रिय पाठक,
कविता मन के भावनाओ का दर्पण होता है।
आज मै आप सभी के समक्ष अपनी प्रथम रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ /



'' वो अजनबी सा चेहरा''
कभी बागों के झूले, कभी सावन की बाहें।
कभी समंदर की लहरे, कभी हवा की सदाएं। 
हर वक़्त हर जगह, परेशान करती है मुझे। 
वो अजनबी सा चेहरा, वो घूरती सी निगाहें ॥ १ ॥  

तलाश करता हूँ मंदिरों और मस्जिदों में जिसे। 
ऑंखें बंद करता हूँ तो पलकों पे देखता हूँ उसे । 
मिन्नतें करती है खुदा से, और देती है मुझे दुआएं । 
वो अजनबी सा चेहरा, वो घूरती सी निगाहें ॥ २ ॥ 

  साथ अपने वो एक खुशनुमा बहार लाती है। 
उसके पायल के एक खनक ही मुझे जगा जाती है। 
घायल करने का इरादा, रखती है उसकी ये अदाएं। 
वो अजनबी सा चेहरा, वो घूरती सी निगाहें ॥ ३ ॥  

देखता आईना हूँ तो, सूरत उसकी दिखाई देती है। 
साँस मै लेता हूँ, धड़कन उसकी सुनाई देती है। 
खेल, 'आँख मिचौली' का खेल, हर घड़ी वो मुझे सताए। 
वो अजनबी सा चेहरा वो घूरती सी निगाहें ॥ ४ ॥


"दीपक"