सफर में कोई तन्हा छोड़ जाए तो दुःख होता है।
छोटी सी बात पर कोई रूठ जाए तो दुःख होता है।
बेगानों से मिले गम तो कोई बात नही।
चोट कोई अपना दे जाए तो दुःख होता है।
"दीपक"
Message
Jarre Jarre me usi ka noor hai.
Jhank khud me na vo tujhse door hai.
Isq hai usase to sabse isq kar.
Ish ibadat ka bas yahi dastoor hai
Jhank khud me na vo tujhse door hai.
Isq hai usase to sabse isq kar.
Ish ibadat ka bas yahi dastoor hai
Monday, December 14, 2009
Wednesday, December 2, 2009
प्रिय पाठक,
कविता मन के भावनाओ का दर्पण होता है।
आज मै आप सभी के समक्ष अपनी प्रथम रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ /
'' वो अजनबी सा चेहरा''
कभी बागों के झूले, कभी सावन की बाहें।
कभी समंदर की लहरे, कभी हवा की सदाएं।
हर वक़्त हर जगह, परेशान करती है मुझे।
वो अजनबी सा चेहरा, वो घूरती सी निगाहें ॥ १ ॥
तलाश करता हूँ मंदिरों और मस्जिदों में जिसे।
ऑंखें बंद करता हूँ तो पलकों पे देखता हूँ उसे ।
मिन्नतें करती है खुदा से, और देती है मुझे दुआएं ।
वो अजनबी सा चेहरा, वो घूरती सी निगाहें ॥ २ ॥
साथ अपने वो एक खुशनुमा बहार लाती है।
उसके पायल के एक खनक ही मुझे जगा जाती है।
घायल करने का इरादा, रखती है उसकी ये अदाएं।
वो अजनबी सा चेहरा, वो घूरती सी निगाहें ॥ ३ ॥
देखता आईना हूँ तो, सूरत उसकी दिखाई देती है।
साँस मै लेता हूँ, धड़कन उसकी सुनाई देती है।
खेल, 'आँख मिचौली' का खेल, हर घड़ी वो मुझे सताए।
वो अजनबी सा चेहरा वो घूरती सी निगाहें ॥ ४ ॥
कविता मन के भावनाओ का दर्पण होता है।
आज मै आप सभी के समक्ष अपनी प्रथम रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ /
'' वो अजनबी सा चेहरा''
कभी बागों के झूले, कभी सावन की बाहें।
कभी समंदर की लहरे, कभी हवा की सदाएं।
हर वक़्त हर जगह, परेशान करती है मुझे।
वो अजनबी सा चेहरा, वो घूरती सी निगाहें ॥ १ ॥
तलाश करता हूँ मंदिरों और मस्जिदों में जिसे।
ऑंखें बंद करता हूँ तो पलकों पे देखता हूँ उसे ।
मिन्नतें करती है खुदा से, और देती है मुझे दुआएं ।
वो अजनबी सा चेहरा, वो घूरती सी निगाहें ॥ २ ॥
साथ अपने वो एक खुशनुमा बहार लाती है।
उसके पायल के एक खनक ही मुझे जगा जाती है।
घायल करने का इरादा, रखती है उसकी ये अदाएं।
वो अजनबी सा चेहरा, वो घूरती सी निगाहें ॥ ३ ॥
देखता आईना हूँ तो, सूरत उसकी दिखाई देती है।
साँस मै लेता हूँ, धड़कन उसकी सुनाई देती है।
खेल, 'आँख मिचौली' का खेल, हर घड़ी वो मुझे सताए।
वो अजनबी सा चेहरा वो घूरती सी निगाहें ॥ ४ ॥
"दीपक"
Tuesday, December 1, 2009
Rastra ke naam naman
प्रिय पाठकगण ,
आज आप लोगो के बीच में आकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। इस ब्लॉग के माध्यम से मै आप लोगो तक अपने विचार पहुचना चाहता हू; साथ ही साथ आप लोगो तक अपने साहित्यिक रचनायों को पहुचाना चाहता हू।
धन्यवाद।
आज आप लोगो के बीच में आकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। इस ब्लॉग के माध्यम से मै आप लोगो तक अपने विचार पहुचना चाहता हू; साथ ही साथ आप लोगो तक अपने साहित्यिक रचनायों को पहुचाना चाहता हू।
धन्यवाद।
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