"जरुरी तो नहीं"
इजहारे मोहब्बत में इकरार जरुरी तो नहीं।
हो उनको भी मुझसे प्यार जरुरी तो नहीं।
उठता है इन्कलाब जब याद उनकी आती है।
हो उनके दिल में भी सैलाब जरुरी तो नहीं ॥ १ ॥
आया है नभ में झूमता हुआ बादल ।
हो मेरे घर में भी बरसात जरुरी तो नहीं ॥ २ ॥
उनके गम को सीने से लगाये फिरता हूँ।
हो उनको भी मेरे दर्द का एहसास जरुरी तो नहीं॥ ३ ॥
बनकर शमां आग में उम्र भर जलता रहा है ये 'दीपक' ।
वो भी जलने आये बनकर परवाना ये जरुरी तो नहीं॥४॥

आया है नभ में झूमता हुआ बादल ।
ReplyDeleteहो मेरे घर में भी बरसात जरुरी तो नहीं ॥ २ ॥
Behtareen!