Message

Jarre Jarre me usi ka noor hai.
Jhank khud me na vo tujhse door hai.
Isq hai usase to sabse isq kar.
Ish ibadat ka bas yahi dastoor hai

Tuesday, June 8, 2010

Armaan

"अरमान"
राह में उनकी हम अपने आँखें बिछाये बैठे हैं |
किसी संग दिल से हम मोहब्बत की आस लगाये बैठे हैं |
कोई तो संभालों इस दीवाने को ऐ यारों |
मोहब्बत की आग में हम अपना हाथ जलाये बैठे हैं || १ ||


जाने कैसे फंस गए हम इस इश्क के भंवर में |
तूफानी दरिया में हम चिराग जलाये बैठे हैं || २ ||

उन्हें इल्म भी नही है हमारे इस फसाने की |
हम उस बेमुर्रौवत से मोहब्बत की आस लगाये बैठे हैं || ३ ||

वो सोए है बेफिक्री की चादर में  ऐ 'जालिम'
हम उनके खाबों में अपने अरमान लुटाये बैठे है || ४ ||

"दीपक"