"अरमान"
राह में उनकी हम अपने आँखें बिछाये बैठे हैं |
किसी संग दिल से हम मोहब्बत की आस लगाये बैठे हैं |
कोई तो संभालों इस दीवाने को ऐ यारों |
मोहब्बत की आग में हम अपना हाथ जलाये बैठे हैं || १ ||
जाने कैसे फंस गए हम इस इश्क के भंवर में |
तूफानी दरिया में हम चिराग जलाये बैठे हैं || २ ||
उन्हें इल्म भी नही है हमारे इस फसाने की |
हम उस बेमुर्रौवत से मोहब्बत की आस लगाये बैठे हैं || ३ ||
वो सोए है बेफिक्री की चादर में ऐ 'जालिम'
हम उनके खाबों में अपने अरमान लुटाये बैठे है || ४ ||
"दीपक"
