अविरल , निश्छल , निर्मल, पावन
बहती गंगा की धार हो तुम
मेरे जीवन की आधार हो तुम
रंग - रूप की प्रतिमा तुम
कोमल, सुंदर, तुम पावन हो
मन है दर्पण, तन कंचन सा
तुम प्रेम की पहली सावन हों
जो स्वप्न में थी मूरत मेरी
उस मूरत की आकार हो तुम
मेरे जीवन की आधार हो तुम
दीपक कुमार