Sunday, January 31, 2010

""अभी बाकी है"


जिंदगी में देने अभी इम्तहान बहुत बाकी है।
निकले जो दिल से वो अरमान बहुत बाकी है।। १ ॥

यूँ न मायूश होकर बैठ एक ठोकर पर ऐ राही।
राह में बिखरे काँटों के जाल बहुत बाकी है॥ २ ॥

वक़्त की परवाह न कर चलता जा मंजिल की ओर ।
दिन भी अभी बाकी है रात बहुत बाकी है॥ ३ ॥

अभी तो निकला है इस राह में थोड़ा सा दम।
जोश अभी बाकी है जज्बात बहुत बाकी है ॥ ४ ॥

मौत से पहले न छोड़ यूँ उम्मीद का दामन।
तुझमे अभी जिन्दा इंसान बहुत बाकी है॥ ५ ॥







"दीपक"

Thursday, January 28, 2010



"जरुरी तो नहीं"

इजहारे मोहब्बत में इकरार जरुरी तो नहीं।
हो उनको भी मुझसे प्यार जरुरी तो नहीं।
उठता है इन्कलाब जब याद उनकी आती है।
हो उनके दिल में भी सैलाब जरुरी तो नहीं ॥ १ ॥

आया है नभ में झूमता हुआ बादल ।
हो मेरे घर में भी बरसात जरुरी तो नहीं ॥ २ ॥

उनके गम को सीने से लगाये फिरता हूँ।
हो उनको भी मेरे दर्द का एहसास जरुरी तो नहीं॥ ३ ॥

बनकर शमां आग में उम्र भर जलता रहा है ये 'दीपक' ।
वो भी जलने आये बनकर परवाना ये जरुरी तो नहीं॥४॥









"दीपक "




प्रिय पाठकगण नमस्कार,

आज मै अपनी नविन कविता प्रकाशित कर रहा हूँ; आशा करता हूँ कि आप सब को पसंद आएगा।
कुछ पाठकगण ने शिकायत किया कि वो मेरे ब्लॉग पर कमेन्ट नहीं लिख पाते। मै आप सभी को बताना चाहूँगा कि कमेन्ट लिखने के लिए कमेन्ट पर क्लिक करे और अपना कमेन्ट टाइप करे, उसके बाद निचे दिए गए आप्शन में से anonymous सेलेक्ट करे और send कर दे।


"दर्द"

मेरे अश्क मेरे दर्द का पैमाना है।
हम आशिकों का कही ठौर न ठिकाना है।
अंजाम बस इतना सा है मोहब्बत करने वालो का।
यादों की अग्नि है और उस आग में जल जाना है॥ १ ॥

लब्जो में बयां करना इश्क को आसान नहीं ।
खामोश लबों से इस राज को कह जाना है।। २॥

मिले जो कोई अपना तो मुस्कुरा देते है हम।
ख़ुशी की आड़ में हर गम को छुपाना है॥ ३ ॥

छलका है आंख के समंदर से एक बूँद अभी
दुःख की बदली है और बरसात का भी आना है॥ ४ ॥

इजहार हम अपनी मुहब्बत का कर न सके उनसे।
मासूम से ''दीपक'' का बस इतना सा फ़साना है॥ ५॥


 
 
"दीपक"