""अभी बाकी है"
जिंदगी में देने अभी इम्तहान बहुत बाकी है।
निकले जो दिल से वो अरमान बहुत बाकी है।। १ ॥
यूँ न मायूश होकर बैठ एक ठोकर पर ऐ राही।
राह में बिखरे काँटों के जाल बहुत बाकी है॥ २ ॥
वक़्त की परवाह न कर चलता जा मंजिल की ओर ।
दिन भी अभी बाकी है रात बहुत बाकी है॥ ३ ॥
अभी तो निकला है इस राह में थोड़ा सा दम।
जोश अभी बाकी है जज्बात बहुत बाकी है ॥ ४ ॥
मौत से पहले न छोड़ यूँ उम्मीद का दामन।
तुझमे अभी जिन्दा इंसान बहुत बाकी है॥ ५ ॥
जिंदगी में देने अभी इम्तहान बहुत बाकी है।
निकले जो दिल से वो अरमान बहुत बाकी है।। १ ॥
यूँ न मायूश होकर बैठ एक ठोकर पर ऐ राही।
राह में बिखरे काँटों के जाल बहुत बाकी है॥ २ ॥
वक़्त की परवाह न कर चलता जा मंजिल की ओर ।
दिन भी अभी बाकी है रात बहुत बाकी है॥ ३ ॥
अभी तो निकला है इस राह में थोड़ा सा दम।
जोश अभी बाकी है जज्बात बहुत बाकी है ॥ ४ ॥
मौत से पहले न छोड़ यूँ उम्मीद का दामन।
तुझमे अभी जिन्दा इंसान बहुत बाकी है॥ ५ ॥


