Thursday, January 28, 2010

प्रिय पाठकगण नमस्कार,

आज मै अपनी नविन कविता प्रकाशित कर रहा हूँ; आशा करता हूँ कि आप सब को पसंद आएगा।
कुछ पाठकगण ने शिकायत किया कि वो मेरे ब्लॉग पर कमेन्ट नहीं लिख पाते। मै आप सभी को बताना चाहूँगा कि कमेन्ट लिखने के लिए कमेन्ट पर क्लिक करे और अपना कमेन्ट टाइप करे, उसके बाद निचे दिए गए आप्शन में से anonymous सेलेक्ट करे और send कर दे।


"दर्द"

मेरे अश्क मेरे दर्द का पैमाना है।
हम आशिकों का कही ठौर न ठिकाना है।
अंजाम बस इतना सा है मोहब्बत करने वालो का।
यादों की अग्नि है और उस आग में जल जाना है॥ १ ॥

लब्जो में बयां करना इश्क को आसान नहीं ।
खामोश लबों से इस राज को कह जाना है।। २॥

मिले जो कोई अपना तो मुस्कुरा देते है हम।
ख़ुशी की आड़ में हर गम को छुपाना है॥ ३ ॥

छलका है आंख के समंदर से एक बूँद अभी
दुःख की बदली है और बरसात का भी आना है॥ ४ ॥

इजहार हम अपनी मुहब्बत का कर न सके उनसे।
मासूम से ''दीपक'' का बस इतना सा फ़साना है॥ ५॥


 
 
"दीपक"


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