"मेरी प्रेमिका"
आइये आज आप को कुछ बतलाता हूँ,
आपको अपने जीवन की अविस्मरणीय घटना से अवगत कराता हूँ |
मेरा सुख और सुन्दर काया किसी को भा गई,
वह स्वयं को मेरी प्रेमिका बतला, मेरे ह्रदय में नही बल्कि मेरे मस्तिष्क के कोने में समां गई |
अब ना रातों को नीद ना दिन में भी चैन,
हर वक़्त रहता हूँ ग़मगीन, हर वक़्त बेचैन |
हंसना और गुनगुनाना पूर्ण रूपेण भूल गया,
इस कदर हुआ नकारा कि स्वयं के अस्तित्व को भी भूल गया |
यदि किसी महफ़िल और किसी भीड़ में भी जाता हूँ,
ना जाने क्यों स्वयं को अकेला ही खड़ा पाता हूँ |
तन्हाई का ये आलम था कि मित्र भी दूर रहने लगे,
स्वास्थ ने भी जबाब दे दिया और अलविदा कहने लगे |
बड़े दिनों के बाद इच्छा हुई की आईना देख लूँ ,
स्वयं पर गौर से एक नजर तो फेर लूँ |
आईना देख मै पूर्ण रूप से घबरा गया ,
आँखों तले मेरे अँधेरा छा गया |
मेरा चेहरा पूरी तरह से बदल गया है ,
मानो यौवन पर ग्रहण सा लग गया है |
मेरा सुख , मेरी सुन्दरता , मेरा लक्ष्य,
सब कुछ मुझसे छिन गया है |
अब मै बन गया हूँ पर्याय 'विनाश' का,
मेरे विनाश का कारण कोई और नही बल्कि है मेरी ही "प्रेमिका"
जी हाँ दोस्तों आप भी जान लीजिये चिंता है मेरी "प्रेमिका" |
"दीपक"

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